Tuesday, July 21, 2009

अपना खेत अपनी पाठशाला का छट्टा सत्र



निडाना में अपना खेत अपनी पाठशाला को चलते हुए आज डेढ महिना हो चुका है जबकि कपास की फसल तीन महीने की हो चुकी है। अभी तक महाबीर पिंडा को इस खेत में कोई कीटनाशक इस्तेमाल नही करना पड़ा। इस का मतलब यह नही है कि इस खेत में कोई कीट ही नही आया। अन्य खेतों की तरह कपास के इस खेत में भी हरा तेला, सफेद मक्खी, चुरडा व् मिलीबग नामक रस चूसक कीट पाए गए पर कोई भी कीट आर्थिक स्तर को पार नही कर पाया। हमने पायाकि मिलीबग को फैलने से रोकने में अन्य मांसाहारी कीटों के साथ-साथ अंगीरा नामक सम्भीरका की भूमिका कारगर रही। इस भीरडनुमा छोटी सी सम्भीरका ने मिलीबग की साठ-सत्तर प्रतिशत आबादी को परजीव्याभीत करने में सफलता पाई। कराईसोपा, ब्रुमस, मकड़ी, दस्यु बुगडा, दिद्ड बुगडा व् कातिल बुगडा आदि मांसाहारी कीटों ने मिलकर हरा तेला, सफेद मक्खी, चुरडा व् मिलीबग आदि हानिकारक कीटों की वृध्दि पर लगाम लगाए रखी। रस चूसक कीटों के साथ-साथ अब कपास के खेत में स्लेटी भुंड, तेलन व् चितकबरी सुंडी के पतंगे भी दिखाई देने लगे हैं। ये कीट चर्वक किस्म के हानिकारक कीड़े हैं। इन कीटों का दलिया बना कर पीने वाली डायन मक्खी भी किसानों ने इस खेत में देखी। इतना भुखड एवं बेशर्म मांसाहारी जन्नौर किसानों ने इस से पहले नही देखा था। डा.सुरेन्द्र दलाल ने इस मक्खी को एक टिड्डा उठाये देखा। इस दृश्य को दिखाने की गरज से किसानों को आवाज देकर अपने पास बुलाया। सभी किसान इस नजारे को अभी देख भी नही पाए थे कि यह मक्खी अपने शिकार सम्मेत फुर्र से उड़ गई। समूह बल एवं दृष्टि के बलबूते किसान इस के पीछे पडे रहे। लेकिन मक्खी भी कहाँ हार मानने वाली थी। अपना शिकार साथ लिए-लिए किसानों का आधे किले का चक्कर कटवा दिया। आख़िर में संदीप मलिक ने इसे शिकार सम्मेत पकड़ कर कांच कि बोतल में रोक लिया। अब जाकर सभी किसानों ने इस डायन मक्खी के नजदीक से दर्शन किए। बोतल में भी भगतनी ने अपने शिकार को चट करना नही छोड़ा। इस के बाद शहतूत कि छाया में किसान समूहों ने चार्टों के माध्यम से अपनी- अपनी प्रस्तुति पेश करी। जिस का निष्कर्ष कुलमिलाकर यह निकला कि इस खेत में कपास की फसल में प्राकृतिक संतुलन की मेहरबानी के चलते महाबीर पिंडा को किसी भी कीटनाशक का स्प्रे करने की आवश्यकता नही है। सत्र के अंत में मनबीर व् डा,सुरेन्द्र दलाल ने किसानों को कपास की फसल में समेकित पोषण प्रबंधन की विस्तार से जानकारी दी। बाग्गे पंडित द्वारा बाकुली वितरण के साथ आज के कार्यक्रम की जय बोल दी गई।

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